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    शंकर मुश्किल से सात वर्ष के थे, जब उनके पिता का निधन हो गया था। उनकी माता जी ने उनकी उचित शिक्षा का पूरा ध्यान रखा, जैसी कि एक तरुण
  • आदि शंकराचार्य - विकिपीडिया
    आचार्य शंकर का जन्म ५०७ ई स पू में केरल में कालड़ी अथवा 'काषल' नामक ग्राम में हुआ था। आचार्य शंकर के पिता का नाम शिवगुरु भट्ट और माता
  • शिवावतार भगवान श्रीमद् आदि शंकराचार्य (जन्म जयंती पर विशेष )
    जिस समय भगवान् श्रीशङ्कराचार्य आविर्भूत हुए थे, उस समय देश में सद्धर्म का अनुष्ठान प्रायः लुप्त हो गया था। केवल इतना ही नहीं, उसका
  • आदि शंकराचार्य जयंती: जानें शिवावतार श्री शंकर के जन्म, गुरु परंपरा और . . .
    केरल के कालड़ी में हुआ था। उनके माता-पिता आर्यांबा और श्रीशिवगुरु को समय पर संतान प्राप्त नहीं हुई तो इसके लिए उन्होंने शिव-शक्ति की आराधना की। भगवान शिव ने उन्हें सर्वज्ञ, यशस्वी, अल्पायु पुत्र के रूप में स्वयं अवतीर्ण होने का वर दिया। भगवान शिव के अनुग्रह से प्राप्त शिशु का नाम शंकर रखा गया, जो बाद में शिवावतार आदि शंकराचार्य के नाम से विख्यात हुए। पांच वर्ष की अवस्था में उनका उपनयन संस्कार हुआ, उसी वर्ष उनके पिता का देहांत हो गया। कुल नौ वर्ष की आयु में उन्होंने सर्वभूतहृदय श्रीशुकदेवजी के शिष्य श्रीगौड़पादाचार्य के शिष्य श्रीगोविंद पादाचार्य से संन्यास दीक्षा का विधिवत उपदेश प्राप्त किया। यद्यपि आठ वर्ष की वय में ही कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी, संवत 2639 को वह संन्यास पथ पर प्रयाण कर चुके थे।
  • भगवान शंकर के अवतार आदि शंकराचार्य
    इन्होंने लगभग पूरे भारत की यात्रा की और इनके जीवन का अधिकांश भाग उत्तर भारत में बीता। चार पीठों (मठ) की स्थापना करना इनका मुख्य रूप से उल्लेखनीय कार्य रहा, जो आज भी मौजूद है। शंकराचार्य को भारत के ही नहीं अपितु सारे संसार के उच्चतम दार्शनिकों में महत्व का स्थान प्राप्त है। उन्होंने अनेक ग्रन्थ लिखे हैं, किन्तु उनका दर्शन विशेष रूप से उनके तीन भाष्यों में, जो उपनिषद, ब्रह्मसूत्र और गीता पर हैं, मिलता है। गीता और ब्रह्मसूत्र पर अन्य आचार्यों के भी भाष्य हैं, परन्तु उपनिषदों पर समन्वयात्मक भाष्य जैसा शंकराचार्य का है, वैसा अन्य किसी का नहीं है।
  • जगदगुरु श्री आदि शंकराचार्य की जन्म जयंती – Shri Vidya
    शंकराचार्य ने हिंदू धर्म को व्यवस्थित करने का भरपूर प्रयास किया। उन्होंने हिंदुओं की सभी जातियों को इकट्ठा करके ‘दसनामी संप्रदाय
  • आदि शंकराचार्य - भारतकोश, ज्ञान का हिन्दी महासागर
    शंकराचार्य का कथन है कि अद्वैत दर्शन की परम्परा अत्यन्त प्राचीन है और उपनिषदों की शिक्षा पर अवलम्बित है। अद्वैत दर्शन के तीन पहलू
  • शंकराचार्य का जीवन परिचय | Biography of Shankaracharya | आदि शंकराचार्य
    शंकराचार्य जी का जन्म वैशाख मास की शुक्ल पंचमी के दिन हुआ था। इनसे पूर्व इनके माता-पिता संतानहीन थे। उन्होंने पुत्र प्राप्ति के लिए
  • शिव शंकर का जन्म कैसे हुआ? अद्भुत रहस्य #trending #viral #shorts
    अद्भुत रहस्य 🔱भगवान शिव को आदि और अनंत कहा जाता है 🙏उनका जन्म किसी सामान्य
  • आदि शङ्कराचार्य - Govardhan Math, Puri
    वैदिक सनातन धर्म की पुनर्स्थापना करने वाले महान दार्शनिक आदि शंकराचार्य का जन्म भारत के केरल प्रांत में एर्णाकुलम जिले के ग्राम





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